Welcome to Focus Orbit. We provide the best study material, notes, and preparation strategies for UPSC and competitive exams to help you succeed

UPSC Logo

Breaking

Saturday, 27 June 2026

भारत-दक्षिण अफ्रीका टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और अफ्रीका रणनीति | UPSC notes

 

भारत-दक्षिण अफ्रीका टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और अफ्रीका रणनीति

प्रिलिम्स के लिये: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्क्वायर किलोमीटर ऐरे, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन, अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र

मेन्स के लिये: भारत-अफ्रीका संबंध: विकास, महत्त्व और चुनौतियाँ, तकनीक की भूमिका, विदेश नीति में कूटनीति

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

जून 2026 में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अपने 31 वर्ष पुराने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी (1995 के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समझौते के तहत स्थापित) को अनुसंधान-केंद्रित सहयोग से आगे बढ़ाकर औद्योगिक सह-उत्पादन के स्तर तक उन्नत किया।

  • यह साझेदारी तेलंगाना–दक्षिण अफ्रीका सहयोग ढाँचे के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ हुई, जो भारत–अफ्रीका संबंधों की बढ़ती रणनीतिक गहराई को दर्शाती है तथा उन्हें “अस्थिर विश्व में स्थिरता के स्रोत” के रूप में रेखांकित करती है।

सारांश

  • भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अपनी साझेदारी को पारंपरिक अनुसंधान सहयोग से आगे बढ़ाकर प्रौद्योगिकी-आधारित औद्योगिक सह-उत्पादन के स्तर तक उन्नत किया है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), महत्त्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य सेवा, हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही भारत–अफ्रीका रणनीतिक संबंधों को भी सुदृढ़ किया गया है।
  • भारत की व्यापक अफ्रीका रणनीति अब ऋण-आधारित विकास के बजाय आर्थिक एकीकरण और आपूर्ति शृंखला पर केंद्रित हो रही है। इसके तहत क्षेत्रीय व्यापार समूहों, अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (AfCFTA), महत्त्वपूर्ण खनिज साझेदारियों और ग्लोबल साउथ सहयोग के माध्यम से व्यापार, निवेश तथा भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारत-दक्षिण अफ्रीका नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की मुख्य प्राथमिकताएँ क्या हैं?

  • उभरते क्षेत्रों की ओर बदलाव: दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और उन्नत विनिर्माण को द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी सहयोग के अगले चरण के प्रमुख स्तंभों के रूप में निर्धारित किया है।
    • यह साझेदारी क्वांटम प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स और साइबर-फिजिकल सिस्टम्स जैसे उभरते क्षेत्रों में सक्रिय रूप से विस्तार कर रही है तथा सैद्धांतिक अनुसंधान से आगे बढ़कर विस्तार योग्य प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
  • हरित हाइड्रोजन ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी का विस्तार: सहयोगात्मक ढाँचे नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों तथा वैक्सीन विकास के आस-पास विकसित किये जा रहे हैं, ताकि भारत की किफायती स्वास्थ्य सेवा नवाचार प्रणाली एवं दक्षिण अफ्रीका के हरित ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों का लाभ उठाया जा सके।
  • दीर्घ अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान सहयोग का विस्तार: दोनों पक्षों ने स्क्वायर किलोमीटर ऐरे परियोजना में अपने प्रमुख सहयोग की समीक्षा की तथा इसे उन्नत वैश्विक कंप्यूटिंग क्षमताओं, बिग डेटा विश्लेषण तथा मानव संसाधन विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रेरक के रूप में मान्यता दी।
  • विज्ञान को सामाजिक प्रभाव में रूपांतरित करना: भविष्य की सह-वित्तपोषित पहलों का मूल्यांकन इस आधार पर सख्ती से किया जाएगा कि वे स्थानीय रोज़गार सृजन, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिये अनुकूल समावेशी डिजिटल प्लेटफार्मों के निर्माण में कितनी सक्षम हैं।
  • तेलंगाना–दक्षिण अफ्रीका साझेदारी: तेलंगाना ने दक्षिण अफ्रीका के साथ एक प्रत्यक्ष सहयोग ढाँचे पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके तहत हैदराबाद की IT, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), रक्षा, एयरोस्पेस, स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में मज़बूती का उपयोग किया जाएगा। 
  • इस साझेदारी का उद्देश्य चिकित्सा पर्यटन, थोक दवाओं एवं वैक्सीन के सह-उत्पादन, सुदृढ़ स्वास्थ्य आपूर्ति शृंखलाओं तथा कृषि-प्रसंस्करण और उन्नत विनिर्माण में निवेश सहयोग को प्रोत्साहित करना है, साथ ही तेलंगाना के वैश्विक निवेश शिखर सम्मेलनों में दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

भारत अफ्रीका में अपनी आर्थिक रणनीति को कैसे बदल रहा है?

  • महाद्वीपीय से क्षेत्रीय व्यापार समझौतों की ओर बदलाव: भारत ने सीमापारीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की योजनाओं को स्थगित कर दिया है और इसके बजाय दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) जैसे क्षेत्रीय समूहों के साथ समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच वस्तुओं की आसान आवाजाही संभव हो सके।
  • भारत के निवेश हितों की सुरक्षा: अफ्रीका में भारत के कुल निवेश के 80 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने के साथ, नई दिल्ली मौजूदा निवेशों की सुरक्षा, MSME की भागीदारी को सुदृढ़ करने तथा क्षेत्रीय अस्थिरता से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिये अनुकूलित आर्थिक ढाँचे विकसित कर रही है।
  • उर्वरक और ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं का विविधीकरण: पारंपरिक खाड़ी आपूर्ति मार्गों में व्यवधान के जोखिम को कम करने के लिये भारत अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया तथा मोरक्को के साथ उर्वरक एवं ऊर्जा साझेदारियों का विस्तार कर रहा है, जिससे कृषि एवं ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।
  • हरित संक्रमण के लिये महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा: भारत लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा तत्त्वों और अन्य रणनीतिक खनिजों तक पहुँच को द्विपक्षीय साझेदारियों में शामिल कर रहा है, जिससे घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन (EV) विनिर्माण और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को समर्थन मिलता है, साथ ही स्थानीय खनिज प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • AfCFTA बाज़ार का उपयोग: भारत अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (AfCFTA), जो 3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाज़ार है और 1.4 अरब लोगों को कवर करता है, का तेज़ी से उपयोग कर रहा है। इसके तहत दक्षिण अफ्रीका और केन्या जैसे देशों में विनिर्माण एवं प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं ताकि पूरे महाद्वीप के बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित की जा सके। 
  • सह-उत्पादन की ओर संक्रमण: भारत ने 42 अफ्रीकी देशों में 12 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की ऋण रेखाएँ प्रदान की हैं, लेकिन अब उसका जुड़ाव औद्योगिक सह-उत्पादन, प्रौद्योगिकी साझेदारियों, कौशल विकास, स्वास्थ्य सहयोग और मूल्य-शृंखला एकीकरण की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जैसा कि हालिया भारत–दक्षिण अफ्रीका समझौतों में परिलक्षित होता है।
  • BRICS नवाचार ढाँचे का सक्रियकरण: भारत ने दक्षिण अफ्रीका को चेन्नई में आयोजित होने वाली आगामी BRICS विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक (अगस्त 2026) में सक्रिय भागीदारी के लिये आमंत्रित किया है, ताकि पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। अफ्रीकी मंच के साथ सहभागिता: दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत को विज्ञान फोरम साउथ अफ्रीका 2026 में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया है, जिससे पूरे अफ्रीका में ज्ञान के आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग के लिये एक समानांतर मंच विकसित हो सके।

भारत और अफ्रीका के बीच गहरे होते संबंधों का भू-राजनीतिक महत्त्व क्या है?

  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: भारत और अफ्रीकी संघ ग्लोबल साउथ के लिये एक मज़बूत आवाज़ के रूप में उभर रहे हैं, जो ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, ब्रेटन वुड्स संस्थानों और जलवायु वित्त ढाँचे में सुधारों का समर्थन कर रहे हैं।
    • इसके साथ ही, सागर (SAGAR) सिद्धांत के तहत, भारत ने समुद्री डकैती (Piracy at sea) और अवैध तस्करी के खिलाफ महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने के लिये संयुक्त नौसैनिक जुड़ाव, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता संबंधी पहल तथा 'सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र' (IFC-IOR) के माध्यम से सूचनाओं के आदान-प्रदान द्वारा अफ्रीकी देशों के साथ समुद्री सहयोग को सुदृढ़ किया है।
  • "डेब्ट-ट्रैप" (कर्ज के जाल) कूटनीति के प्रतिकार के रूप में: कंपाला सिद्धांत (2018) द्वारा कड़ाई से शासित भारत का जुड़ाव, अन्य प्रमुख शक्तियों (जैसे चीन के FOCAC) द्वारा प्रदान किये जाने वाले अपारदर्शी और भारी राज्य-समर्थित बुनियादी ढाँचा ऋणों का एक स्पष्ट विकल्प प्रस्तुत करता है।
  • भारत पारदर्शी, मांग-आधारित क्षमता निर्माण पर बल देता है, जो संप्रभु वित्तीय अखंडता का सम्मान करता है।
  • वैश्विक शांति स्थापना अभियानों को बनाए रखना: अफ्रीकी स्थिरता के प्रति भारत की ऐतिहासिक प्रतिबद्धता दक्षिण सूडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) जैसे अशांत क्षेत्रों में 5,000 से अधिक सक्रिय भारतीय शांति सैनिकों की उपस्थिति से सिद्ध होती है, जो एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की साख को मज़बूत करती है।
  • राजनयिक पदचिह्नों को संस्थागत रूप देना: संपूर्ण महाद्वीप में 17 नए राजनयिक मिशनों को खोलकर (जिससे कुल संख्या 46 हो गई है) भारत ने अफ्रीका के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में प्रत्यक्ष और मज़बूत राजनयिक दृश्यता सुनिश्चित की है, जिससे वास्तविक समय में संकट प्रबंधन तथा स्थानीय भू-राजनीतिक खुफिया जानकारी प्राप्त करने में सुविधा हो रही है।
  • भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (IAFS) को पुनर्जीवित करना: IAFS-IV का आयोजन महाद्वीपीय रोडमैप को रीसेट (पुनर्निर्धारित) करता है, जिससे द्विपक्षीय वार्ता मात्र संबंधों से बदलकर उच्चतम कार्यकारी स्तरों पर निरंतर, संरचनात्मक भू-राजनीतिक संरेखण में परिवर्तित हो रही हैं।

भारत-अफ्रीका संबंधों में मुख्य ढाँचागत चुनौतियाँ क्या हैं?

  • परियोजना कार्यान्वयन में कमियाँ: विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्टों में लक्षित ऋण व्यवस्था या क्रेडिट लाइन्स (LoC) के संवितरण और निष्पादन में गंभीर नौकरशाही विलंब को बार-बार रेखांकित किया गया है।
    • ये दूरियाँ/विलंब राजनयिक विश्वास को कमज़ोर करती हैं और भारत की विकासात्मक सहायता के वास्तविक प्रभाव को कम करती हैं।
  • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा में विषमता: बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और फोरम ऑन चाइना-अफ्रीका कोऑपरेशन (FOCAC) के माध्यम से चीन की गहरी आर्थिक पैठ, भारतीय संप्रभु निवेशों की तुलना में बहुत बड़े पैमाने पर है।
    • भारतीय निजी पूंजी को प्रायः भारी सब्सिडी वाले, राज्य-समर्थित चीनी मेगा-प्रोजेक्ट्स (बड़ी परियोजनाओं) से प्रतिस्पर्द्धा करने में संघर्ष करना पड़ता है।
  • राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय संघर्ष: सैन्य तख्तापलट, उग्रवाद और राजनीतिक अस्थिरता की बढ़ती आवृत्ति, विशेष रूप से सहेल क्षेत्र तथा पश्चिम अफ्रीका के कुछ हिस्सों में, एक अप्रत्याशित वातावरण का निर्माण करती है जो भारतीय निजी क्षेत्र के दीर्घकालिक निवेश को हतोत्साहित करती है।
    • संरचनात्मक व्यापार संबंधी बाधा और गैर-टैरिफ अवरोध: मज़बूत व्यापार मात्रा के बावजूद, अनुकूल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 54 अलग-अलग अफ्रीकी देशों के जटिल घरेलू विनियामक परिदृश्यों, प्रतिबंधात्मक पादप-स्वच्छता उपायों और सीधे विमानन व समुद्री संपर्क की निरंतर कमी के कारण सीमित है।
  • भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा: कुछ अफ्रीकी देशों में स्थानीय आर्थिक चिंताओं और उच्च बेरोज़गारी दरों के कारण कभी-कभी विदेशियों के खिलाफ हिंसक भावनाएँ भड़क उठती हैं या विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता है।
    • 30 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिये संवेदनशील और निरंतर कांसुलर (दूतावास संबंधी) हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
  • पैराडिप्लोमेसी पर संवैधानिक सीमा: हालाँकि राज्यों के नेतृत्व वाली पहल (जैसे तेलंगाना का संपर्क अभियान) आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं, लेकिन विदेश मामले पूरी तरह से संघ सूची (7वीं अनुसूची, प्रविष्टि 10) के अंतर्गत आते हैं।
    • यह संरचनात्मक वास्तविकता नीतिगत टकराव का कारण बन सकती है, जिससे राज्यों को अंतर्राष्ट्रीय ज्ञापनों (MoU) को निष्पादित करने से पहले जटिल केंद्रीय स्वीकृतियों से गुज़रना पड़ता है।

भारत-अफ्रीका संबंधों को सुदृढ़ करने के लिये क्या उपाय किये जा सकते हैं?

  • नियमित शिखर सम्मेलनों को संस्थागत रूप देना: भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (IAFS-IV) को पुनः आयोजित करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस शिखर सम्मेलन को महामारी के बाद का, प्रौद्योगिकी-प्रथम रोडमैप तैयार करना चाहिये जो स्पष्ट रूप से अफ्रीकी संघ के 'एजेंडा 2063' के अनुरूप हो।
  • क्षेत्र-विशिष्ट कार्यबलों का गठन: भारत के घरेलू इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण के लक्ष्यों के लिये आवश्यक निर्बाध एवं न्यायसंगत आपूर्ति सीमाओं को सुरक्षित करने के लिये 'क्रिटिकल मिनरल्स' (महत्त्वपूर्ण खनिजों) पर एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) का तत्काल गठन आवश्यक है।
  • पैराडिप्लोमैटिक ढाँचों को सुव्यवस्थित करना: विदेश मंत्रालय (MEA) के दिशा-निर्देशों में तेज़ी लाई जाए ताकि राज्य सरकारों को उनके अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक संपर्क अभियानों में सशक्त बनाया जा सके और सक्रिय राज्यों द्वारा आकर्षित किये जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का निर्बाध निष्पादन सुनिश्चित हो सके।
  • निजी पूंजी का एकीकरण: भारतीय कूटनीति को MSME और बड़े कॉर्पोरेट समूहों को AfCFTA (अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र) ढाँचे के भीतर केवल निर्यातक होने के बजाय वहाँ स्थानीय स्तर पर विनिर्माता बनने के लिये सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करना चाहिये, जिससे एक मूल्य-शृंखला एकीकृत आर्थिक मॉडल को मज़बूती मिले। 
  • रक्षा क्षमता निर्माण का विस्तार: संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना से परे जाकर, भारत को सीधे रक्षा सहयोग को बढ़ाना चाहिये, जिसमें अफ्रीकी सेनाओं के लिये आतंकवाद-विरोधी प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा ढाँचे और स्थानीय स्तर पर सैन्य उपकरणों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
  • DPI (डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे) को मुख्य निर्यात के रूप में उपयोग करना: अफ्रीकी देशों में वित्तीय समावेशन में क्रांति लाने के लिये 'इंडिया स्टैक' के पदचिह्नों का विस्तार करना स्वाभाविक रूप से ग्लोबल साउथ के प्राथमिक तकनीकी प्रदाता के रूप में भारत की भूमिका को पुख्ता करेगा, जिससे अत्यधिक सॉफ्ट पावर और भू-राजनीतिक सद्भावना उत्पन्न होगी।

निष्कर्ष

साझा इतिहास से साझा समृद्धि की ओर बढ़ते हुए, भारत-अफ्रीका संबंध क्रेडिट-आधारित (ऋण-आधारित) जुड़ाव से आगे बढ़कर सह-उत्पादन, प्रौद्योगिकी साझेदारी और आपूर्ति शृंखलाओं के रूप में विकसित हो रहे हैं। क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को गहरा करके और रणनीतिक संसाधनों को सुरक्षित करके, यह साझेदारी ग्लोबल साउथ के सहयोग को मज़बूत कर रही है तथा एक बढ़ते विश्व में स्थिरता लाने में योगदान दे रही है।

 मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों में विकास सहायता से रणनीतिक आर्थिक साझेदारी की ओर बदलाव देखा जा रहा है। विचार कीजिये।

Ans:-

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. वर्ष 2026 की भारत-दक्षिण अफ्रीका प्रौद्योगिकी साझेदारी अपग्रेड (उन्नयन) का क्या महत्त्व है?
यह AI, DPI, उन्नत विनिर्माण, जीनोमिक्स, हाइड्रोजन ऊर्जा तथा स्वास्थ्य सेवा जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान-आधारित सहयोग से औद्योगिक सह-उत्पादन की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।

2. AfCFTA क्या है और यह भारत के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
AfCFTA (अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र) 1.4 अरब लोगों को कवर करने वाला 3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का एक एकीकृत अफ्रीकी बाज़ार है, जो भारत को संपूर्ण महाद्वीप में बड़े व्यापार, निवेश और विनिर्माण के अवसर प्रदान करता है।

3. भारत-अफ्रीका संबंधों में 'क्रिटिकल मिनरल्स' (महत्त्वपूर्ण खनिज) क्यों प्रमुख बनते जा रहे हैं?
अफ्रीका के लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्त्वों के भंडार भारत के EV इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर उद्योग तथा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

4. अफ्रीका में भारत का एंगेजमेंट मॉडल अन्य प्रमुख शक्तियों से किस प्रकार भिन्न है?
भारत मांग-आधारित विकास, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास और पारदर्शी साझेदारी पर बल देता है जो अफ्रीकी प्राथमिकताओं का सम्मान करती है।

5. भारत-अफ्रीका संबंधों को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? 
परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विलंब, चीन का बढ़ता प्रभाव, राजनीतिक अस्थिरता, व्यापारिक बाधा, कनेक्टिविटी (संपर्क) की सीमाएँ, प्रवासियों की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और जटिल विनियामक प्रणालियाँ निरंतर गहन सहयोग में बाधा बनी हुई हैं। 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित में से किस समूह के सभी चारों देश G20 के सदस्य हैं? (2020)

(a) अर्जेंटीना, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की

(b) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड

(c) ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम

(d) इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया

उत्तर: (a)


मेन्स

प्रश्न. भारत-अफ्रीका डिजिटल साझेदारी आपसी सम्मान, सह-विकास और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी प्राप्त कर रही है। विस्तार से बताइये। (2025) 

Ans:-

प्रश्न. 'उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था में, भारत द्वारा प्राप्त नव-भूमिका के कारण, उत्पीड़ित एवं उपेक्षित राष्ट्रों के मुखिया के रूप में दीर्घ काल से संपोषित भारत की पहचान लुप्त हो गई है।' विस्तार से समझाइये। (2019)

Ans:-

------------------------------------------------------******-----------------------------------------------

🎯 Focus Orbit Educational Network से जुड़ें:

UPSC Civil Services परीक्षा की पूरी तैयारी और daily updates के लिए हमारे अन्य महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म्स को अभी फॉलो करें:

* 🌐 Our Blogger Website (Daily Current Affairs): https://focusorbitupsc.blogspot.com/

* 🌐 Our WordPress Blog (Prelims MCQ Tests): https://focusorbitupsc.wordpress.com/

* 📸 Follow on Instagram (Daily Mindmaps & Shorts): https://www.instagram.com/focusorbit_official/

* 📺 Subscribe on YouTube (Video Lectures): https://www.youtube.com/@Focusorbit_official

* 🐦 Follow on Twitter/X (Important Articles & News): https://x.com/Ravikumar676416

* 👥 Follow Facebook Page: https://www.facebook.com/focusorbitofficial/

* 👤 Connect on Facebook Profile: https://www.facebook.com/ravikumar676416/

* 🌐 Our Smart Digital Card: https://ravi7star.cam

✉telligram channel: -    https://t.me/focusorbit_official