डेली न्यूज़ (06 Jun, 2026)
विश्व पर्यावरण दिवस 2026
प्रिलिम्स के लिये: विश्व पर्यावरण दिवस, एक पेड़ माँ के नाम अभियान, मिशन LiFE, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम्स (MISHTI), मिशन अमृत सरोवर।
मेन्स के लिये: प्रकृति-आधारित समाधान और जलवायु परिवर्तन को कम करना, मिशन LiFE तथा पर्यावरण प्रशासन में व्यवहार संबंधी बदलाव।
चर्चा मे क्यों?
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून, 2026) के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत वृक्षारोपण की एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त करने पर उत्तर प्रदेश के नागरिकों को बधाई दी, जो पूरे भारत में ज़मीनी स्तर पर पर्यावरण से जुड़े प्रयासों में तेज़ी आने का संकेत है।
सारांश
- एक पेड़ माँ के नाम अभियान और विश्व पर्यावरण दिवस 2026, जलवायु अनुकूलनशीलता के लिये प्रकृति-आधारित समाधानों तथा जन-केंद्रित पर्यावरणीय शासन की ओर भारत के बढ़ते झुकाव को रेखांकित करते हैं।
- पारिस्थितिक तंत्र की बहाली के व्यापक विस्तार और दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता को प्राप्त करने के लिये जलवायु वित्त, पारिस्थितिक डेटा प्रणालियों, प्राकृतिक पूंजी लेखांकन तथा सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा।
विश्व पर्यावरण दिवस क्या है?
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1972 में स्टॉकहोम में मानव पर्यावरण पर सम्मेलन (1972) के शुभारंभ के उपलक्ष्य में विश्व पर्यावरण दिवस (WED) की स्थापना की गई थी।
- प्रथम आयोजन: यह पहली बार वर्ष 1973 में 'केवल एक पृथ्वी' (Only One Earth) की थीम के साथ मनाया गया था।
- आयोजन निकाय: नैरोबी, केन्या में मुख्यालय वाला संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) इसके वार्षिक वैश्विक अभियानों का समन्वय करता है।
- विश्व पर्यावरण दिवस 2026:
- मेज़बान देश: UNEP के नेतृत्व में, वर्ष 2026 के वैश्विक समारोहों की मेज़बानी अज़रबैजान गणराज्य द्वारा अपनी राजधानी बाकू में की गई।
- अज़रबैजान का चयन रणनीतिक था; वर्ष 2024 के अंत में UNFCCC के COP29 की मेज़बानी करने के बाद, यह देश वैश्विक जलवायु एजेंडे का नेतृत्व करने के लिये एक निरंतर मंच प्रदान करता है।
- थीम: वर्ष 2026 की थीम "प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिये। हमारे भविष्य के लिये।" है।
- प्रकृति से प्रेरित: यह प्रकृति-आधारित समाधानों (NbS) जैसे कि वनीकरण, पारिस्थितिक तंत्र की बहाली और आर्द्रभूमि संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- जलवायु के लिये: यह कार्बन अवशोषण और अनुकूलनशीलता के निर्माण के माध्यम से जलवायु कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करता है।
- हमारे भविष्य के लिये: यह भावी पीढ़ियों के लिये प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बल देता है।
- मेज़बान देश: UNEP के नेतृत्व में, वर्ष 2026 के वैश्विक समारोहों की मेज़बानी अज़रबैजान गणराज्य द्वारा अपनी राजधानी बाकू में की गई।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान
- परिचय: 'एक पेड़ माँ के नाम' (अंग्रेज़ी अनुवाद: "A Tree in the Name of Mother") एक वैश्विक जन-वृक्षारोपण अभियान है, जिसे विश्व पर्यावरण दिवस 2024 के अवसर पर शुरू किया गया था।
- व्यवहारात्मक प्रोत्साहन और नागरिक भागीदारी: वृक्षारोपण को मातृ सम्मान से जोड़कर, यह अभियान मिशन LiFE (पर्यावरण के लिये जीवनशैली) के मूल दर्शन को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करता है तथा वैश्विक पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिये व्यक्तिगत व्यवहार में परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है।
- पैमाना और राज्यों की भागीदारी: उत्तर प्रदेश ने सभी 75 ज़िलों में पाँच करोड़ (50 मिलियन) पौधों के रोपण के अपने लक्ष्य को न केवल प्राप्त किया बल्कि उसे पार भी कर लिया, जो 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत सबसे बड़े वृक्षारोपण अभियानों में से एक है।
- जलवायु कार्रवाई का यह विकेंद्रीकरण भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की दिशा में प्रगति को गति प्रदान करता है, विशेष रूप से वर्ष 2035 तक संवर्द्धित वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4.0 बिलियन टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के लक्ष्य को।
- वर्ष 2025 तक, भारत ने वन और वृक्ष आवरण से 2.29 बिलियन टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार कर लिया है।
- जलवायु कार्रवाई का यह विकेंद्रीकरण भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की दिशा में प्रगति को गति प्रदान करता है, विशेष रूप से वर्ष 2035 तक संवर्द्धित वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4.0 बिलियन टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के लक्ष्य को।
- संवैधानिक अधिदेश: यह पहल अनुच्छेद 48A के तहत राज्य की नीति निदेशक तत्त्वों (पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्द्धन और वन एवं वन्यजीवों की रक्षा) तथा अनुच्छेद 51A(g) के तहत मूल कर्त्तव्यों (प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्द्धन करना) को मूर्त रूप प्रदान करती है।
प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) क्या हैं?
- परिचय: अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा परिभाषित और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA) द्वारा अनुमोदित, प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) उन क्रियाओं को दर्शाते हैं जो प्राकृतिक या परिवर्तित पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, सतत प्रबंधन तथा पुनर्स्थापन हेतु की जाती हैं।
- ये हस्तक्षेप सामाजिक चुनौतियों (जैसे जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम, खाद्य सुरक्षा) को सशक्त और अनुकूलनशील रूप से संबोधित करते हैं, साथ ही मानव कल्याण तथा जैव विविधता के लाभ भी प्रदान करते हैं।
- इंजीनियर्ड ग्रे इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे कंक्रीट सी-वाल, कृत्रिम कार्बन अवशोषण) के विपरीत, प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके मैक्रोइकॉनॉमिक और पारिस्थितिक स्थिरता प्राप्त करते हैं।
- महत्त्व:
- सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत:
एम.सी. मेहता बनाम कमलनाथ (1997) के ऐतिहासिक निर्णय में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत को दृढ़ता से स्थापित किया और यह घोषित किया कि राज्य सभी प्राकृतिक संसाधनों (नदियाँ, वन, तटीय क्षेत्र) का अभिभारक है।- प्रकृति-आधारित समाधानों (NbS) का कार्यान्वयन राज्य के संवैधानिक दायित्वों को पूरा करता है, जो अनुच्छेद 48A (निर्देशक सिद्धांत) और अनुच्छेद 21 (संपूर्ण पर्यावरण का अधिकार) के तहत निर्धारित हैं, ताकि इन संसाधनों को अपरिवर्तनीय क्षरण से संरक्षित किया जा सके।
- जैव विविधता का अर्थशास्त्र: जैव विविधता के अर्थशास्त्र पर विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त दासगुप्ता समीक्षा के अनुसार, GDP जैसे पारंपरिक व्यापक आर्थिक संकेतक ‘प्राकृतिक पूंजी’ के मूल्यह्रास को शामिल नहीं करते हैं।
- प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) एक ऐसा ढाँचा प्रदान करता है जो जल शुद्धिकरण जैसे आर्द्रभूमि सेवाओं या वन्य कीटों द्वारा परागण जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्य को आंतरिकीकृत करता है, जिससे सामूहिक पारिस्थितिकी पतन से बचाव संभव होता है।
- पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) संरक्षण: प्रकृति-आधारित समाधानों (NbS) के मूल सिद्धांत माधव गाडगिल समिति (2010) की रिपोर्ट – पश्चिमी घाट के सुझावों के साथ निकटता से मेल खाते हैं। इस रिपोर्ट ने क्षेत्र की प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण पर बल दिया, ताकि अनियमित मानसून और भूस्खलन जैसी आपदाओं से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, बजाय इसके कि केवल भारी इंजीनियरिंग उपायों पर निर्भरता रखी जाए।
- जलवायु परिवर्तन शमन: वन संरक्षण तथा आर्द्रभूमि संरक्षण भारत में आवश्यक कार्बन अवशोषण और जल नियमन प्रदान करते हैं, जो वनों की कटाई से उत्पन्न 12–15% उत्सर्जन को कम करते हैं। पुनर्स्थापन प्रयास महत्त्वपूर्ण कार्बन सिंक उत्पन्न कर सकते हैं, जबकि शहरी हरित क्षेत्र तापमान को 2-4°C तक घटाने में योगदान करते हैं।
- सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत:
प्रकृति-आधारित समाधानों (NbS) को बढ़ावा देने के लिये सरकारी पहलें
- राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (GIM),
- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA),
- राष्ट्रीय जल मिशन,
- राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (NAP),
- अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) 2.0, मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम्स (MISHTI)।
- मिशन अमृत सरोवर।
प्रकृति-आधारित समाधानों (NbS) के विस्तार में संरचनात्मक बाधाएँ क्या हैं?
- राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण (NES) का अभाव: प्रभावी प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) के कार्यान्वयन को सूक्ष्म और अनुभवात्मक पारिस्थितिकी डेटा की कमी के कारण गंभीर बाधा का सामना करना पड़ता है।
- यदि जैव विविधता ह्रास, आर्द्रभूमि क्षरण और वन स्वास्थ्य की संपूर्ण राष्ट्रीय एवं औपचारिक आधारभूत ट्रैकिंग उपलब्ध नहीं है, तो NbS हस्तक्षेपों की वास्तविक सफलता या विफलता को मापने के लिये आवश्यक आधार रेखा का निर्धारण करना लगभग असंभव हो जाता है।
- जलवायु पूंजी का संकलन: NbS परियोजनाओं में सामान्यतः मापनीय कार्बन अवशोषण अथवा अनुकूलन संबंधी लाभ प्राप्त होने से पहले लंबी परिपक्वता अवधि होती है।
- विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी की भारित औसत लागत (WACC) उच्च होती है। ऐसे में, दबावग्रस्त सार्वजनिक निधियों या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पर निर्भर रहना, इन परियोजनाओं को व्यापक आर्थिक स्तर तक विस्तार देने हेतु आवश्यक जलवायु पूंजी जुटाने के लिये अत्यंत अपर्याप्त है।
- मूल्यांकन अंतराल: GDP जैसे पारंपरिक व्यापक आर्थिक संकेतक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के आर्थिक मूल्य का आकलन करने में विफल रहते हैं।
- मानकीकृत प्राकृतिक पूंजी लेखांकन के अभाव में, लागत-लाभ विश्लेषण में NbS का मूल्यांकन प्रायः वाणिज्यिक रियल एस्टेट की तुलना में कम आँका जाता है।
- एकल प्रजाति वृक्षारोपण बनाम जैव विविधता: तीव्र वनीकरण के लिये नौकरशाही आधारित अभियान प्रायः विदेशी प्रजातियों के एकल प्रजाति वृक्षारोपण को बढ़ावा देते हैं।
- इसके परिणामस्वरूप मृदा की गुणवत्ता में गिरावट आती है और भूजल संसाधनों का दोहन बढ़ता है, जिससे NbS का मूल उद्देश्य निष्प्रभावी हो जाता है।
- भूमि उपयोग संबंधी संघर्ष: घनी जनसंख्या वाली अर्थव्यवस्था में व्यापक पारिस्थितिक पुनर्स्थापन अक्सर ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है, जहाँ कृषि विस्तार और वन संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
NbS को मज़बूत करने के लिये क्या उपाय किये जा सकते हैं?
- राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण (NES) को संस्थागत रूप देना: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को केंद्रीय बजट से पहले वार्षिक एवं कानूनी आधार पर समर्थित राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण प्रस्तुत करना चाहिये।
- इस सर्वेक्षण में अति-स्थानीय जलवायु सुभेद्यताओं का मानचित्रण किया जाना चाहिये तथा लक्षित प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) रणनीतियों को तैयार करने के लिये आवश्यक अनुभवजन्य पारिस्थितिक लेखांकन प्रदान किया जाना चाहिये।
- मिश्रित वित्त के माध्यम से जलवायु पूंजी को जोखिम-मुक्त करना: ट्रिलियन-डॉलर के वित्तपोषण अंतर को पाटने के लिये, सरकार को सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड का आक्रामक रूप से लाभ उठाना चाहिये और मिश्रित वित्त संरचनाएँ स्थापित करनी चाहिये।
- प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) परियोजनाओं के शुरुआती चरणों के जोखिमों को वहन करने के लिये रियायती सार्वजनिक कोष का उपयोग करने से ये परियोजनाएँ अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों और निजी इक्विटी के लिये व्यावहारिक बन सकेंगी।
- प्राकृतिक पूंजी लेखांकन को मुख्यधारा में लाना: वित्त मंत्रालय और MoSPI को पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन को वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण में शामिल करना चाहिये, ताकि NbS (जैसे आपदा से बचने की लागत) के वित्तीय लाभ नीति निर्माताओं के लिये स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
- प्रौद्योगिकी और निगरानी: वृक्षारोपण की जीवित रहने की दर और कार्बन अवशोषण स्तरों को वास्तविक समय में ट्रैक करने के लिये भूवन पोर्टल (ISRO) और AI-संचालित डैशबोर्ड का उपयोग करें, ताकि MISHTI और नगर वन योजना जैसी योजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- शहरी-ग्रामीण एकीकरण: "पृथक पैच" से आगे बढ़कर ब्लू-ग्रीन कॉरिडोर की दिशा में काम करना। उदाहरण के लिये मरुस्थलीकरण को रोकने और दिल्ली के वायु प्रदूषण को एक साथ कम करने हेतु अरावली ग्रीन वॉल का पुनर्स्थापन।
- स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना: NbS केवल शीर्ष-से-नीचे नौकरशाही के माध्यम से सफल नहीं हो सकता।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA, 2006) को प्रभावी ढंग से लागू करने से यह सुनिश्चित होता है कि पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन सतत आजीविका सृजन के साथ सामंजस्यपूर्ण हो और इन परियोजनाओं के लिये ज़मीनी स्तर पर संरक्षक तैयार हों।
- मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज (जिंगकियांग ज्री), जिन्हें खासी और जयंतिया समुदायों ने विकसित किया है, जीवित संरचनाएँ हैं जो फिकस इलास्टिका की जड़ों को प्रशिक्षित करके बनाई जाती हैं। ये स्थायी अवसंरचना प्रदान करती हैं, जो बाढ़ का सामना कर सकती हैं और मृदा के क्षरण को रोकती हैं।
निष्कर्ष
जैसा कि कहावत है, "प्रकृति कोई भ्रमण स्थल नहीं है, यह हमारा घर है।” भारत लोगों के नेतृत्व वाले पहल जैसे "एक पेड़ माँ के नाम" को नेचर-आधारित समाधानों और वैज्ञानिक पर्यावरणीय शासन के साथ जोड़कर जलवायु अनुकूलन को सुदृढ़ कर सकता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिये सतत भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।
मेन्स प्रश्न: प्रश्न. प्रकृति-आधारित समाधान जलवायु के प्रति अनुकूल और सतत विकास के लिये एक प्रभावी एवं किफायती मार्ग प्रदान करते हैं। भारतीय संदर्भ में चर्चा कीजिये। Ans:- |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. एक पेड़ माँ के नाम अभियान क्या है?
विश्व पर्यावरण दिवस 2024 पर शुरू की गई एक देशव्यापी वृक्षारोपण पहल, जो नागरिकों को अपनी माताओं के सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिये प्रोत्साहित करती है और मिशन LiFE के सिद्धांतों के अनुरूप है।
2. प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) क्या हैं?
NbS (नेचर-आधारित समाधान) ऐसे उपाय हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा, पुनर्स्थापना और सतत प्रबंधन करते हैं, ताकि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास, आपदा जोखिम तथा खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सके, साथ ही पारिस्थितिक एवं सामाजिक लाभ उत्पन्न हों।
3. भारत में पर्यावरण संरक्षण का समर्थन करने वाले संवैधानिक प्रावधान कौन-से हैं?
अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों के लिये पर्यावरण संरक्षण को एक मौलिक कर्त्तव्य बनाता है।
4. पर्यावरण प्रशासन में 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' (सार्वजनिक न्यास सिद्धांत) का क्या महत्त्व है?
M.C. मेहता बनाम कमल नाथ (1997) में मान्यता प्राप्त, इसके अनुसार प्राकृतिक संसाधन राज्य द्वारा जनता के उपयोग हेतु ट्रस्ट में रखे जाते हैं और उनका शोषण निजी हितों के लिये नहीं किया जा सकता।
5. नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस (प्रकृति-आधारित समाधानों) के लिये नेचुरल कैपिटल अकाउंटिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
यह वनों, आर्द्रभूमियों (दलदली क्षेत्रों) और जैव विविधता जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आर्थिक मूल्यांकन करता है, जिससे नीति निर्माण को सुदृढ़ करने तथा पर्यावरण संरक्षण में बेहतर निवेश करने में मदद मिलती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. बेहतर नगरीय भविष्य की दिशा में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र पर्यावास (UN-Habitat) की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2017)
- संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावास को आज्ञापित किया गया है कि वह सामाजिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से धारणीय ऐसे कस्बों एवं शहरों को संवर्द्धित करे जो सभी को पर्याप्त आश्रय प्रदान करते हों।
- इसके साझीदार केवल सरकारें या स्थानीय नगर प्राधिकरण ही हैं।
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावास, सुरक्षित पेयजल व आधारभूत स्वच्छता तक पहुँच बढ़ाने और गरीबी कम करने के लिये संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था के समग्र उद्देश्य में योगदान करता है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) केवल 1
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न: पिछले कुछ वर्षों में भारी बारिश के कारण शहरी बाढ़ की आवृत्ति बढ़ रही है। शहरी बाढ़ के कारणों पर चर्चा करते हुए, ऐसी घटनाओं के दौरान जोखिम को कम करने के लिये तैयारियों पर प्रकाश डालिये। (2016)
Ans:-
प्रश्न. क्या कमज़ोर और पिछड़े समुदायों के लिये आवश्यक सामाजिक संसाधनों की रक्षा करके उनके उत्थान के लिये सरकार योजनाएँ बनाने के कारण शहरी अर्थव्यवस्थाओं में व्यवसायों की स्थापना में बाधा आ रही है। (2014)
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