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Saturday, 27 June 2026

म्याँमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा UPSC daily current affairs notes

 

डेली न्यूज़ (04 Jun, 2026)



म्याँमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा

प्रिलिम्स के लिये: म्याँमार में सैन्य तख्तापलट, रुपया-क्यात निपटान तंत्र, कलादान मल्टी-मॉडल पारगमन परिवहन परियोजना, भारत-म्याँमार-थाईलैंड (IMT) त्रिपक्षीय राजमार्ग, आसियान, सितवे बंदरगाह

मेन्स के लिये: भारत-म्याँमार द्विपक्षीय संबंध, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और आसियान कनेक्टिविटी, भारत की पड़ोसी-प्रथम नीति, पूर्वोत्तर भारत में सीमा प्रबंधन तथा आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों? 

म्याँमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने भारत की पाँच दिवसीय राजकीय यात्रा की, जो वर्ष 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के साथ उच्च स्तरीय चर्चाओं में द्विपक्षीय सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई और साझा क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिये पारस्परिक प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ किया गया।

सारांश

  • म्याँमार भारत की 'एक्ट ईस्ट', 'नेबरहुड फर्स्ट' और भारत-प्रशांत नीतियों का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है, जो पूर्वोत्तर की सुरक्षा, आसियान (ASEAN) कनेक्टिविटी, समुद्री हितों और इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना करने के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • म्याँमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, महत्त्वपूर्ण खनिजों, मानवीय सहायता और लोगों के बीच आपसी संबंधों में सहयोग को सुदृढ़ किया, साथ ही कलादान परियोजना, IMT त्रिपक्षीय राजमार्ग और रुपया-क्यात व्यापार तंत्र जैसी परियोजनाओं के प्रति प्रतिबद्धताओं को दोहराया।

म्याँमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा की मुख्य बातें क्या हैं?

  • सुरक्षा सहयोग: म्याँमार ने आश्वासन दिया कि उसकी धरती का उपयोग भारत विरोधी विद्रोही गुटों जैसे NSCN-K (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग) और ULFA (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम) द्वारा नहीं किया जाएगा, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से म्याँमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने आश्रय स्थल बना रखे हैं।
    • ऐसे सुरक्षित आश्रय स्थलों ने अक्सर द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों में तनाव उत्पन्न किया है, जिसके कारण सीमा पार उग्रवादी शिविरों के खिलाफ 'ऑपरेशन सनराइज' (2019) और भारत के 'ऑपरेशन हॉट परस्यूट' (2015) जैसे समन्वित अभियान चलाए गए।
  • व्यापार और आर्थिक एकीकरण: दोनों देश वर्ष 2024 से संचालित 'रुपया-क्यत निपटान तंत्र' के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने और कृषि-प्रसंस्करण, पेट्रोलियम, ऊर्जा तथा खनन क्षेत्रों में निवेश सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए।
  • कनेक्टिविटी परियोजना: कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्याँमार-थाईलैंड (IMT) त्रिपक्षीय राजमार्ग को गति देने के लिये प्रतिबद्धता दोहराई गई।
  • सामरिक महत्त्व: भारत ने म्याँमार के साथ जुड़ाव की पुष्टि की और उसकी 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों के लिये इसके महत्त्व पर बल दिया।
  • लोगों के बीच आपसी संबंध: भारत ने म्याँमार के छात्रों के लिये मेकांग गंगा आईसीसीआर (ICCR) छात्रवृत्ति की संख्या 36 से बढ़ाकर 100 कर दी।
  • महत्त्वपूर्ण खनिज सहयोग: भारत और म्याँमार महत्त्वपूर्ण खनिजों तथा दुर्लभ मृदा तत्त्वों के बढ़ते सामरिक महत्त्व को स्वीकार करते हुए, इस क्षेत्र में समन्वय एवं सहयोग को सुदृढ़  करने पर सहमत हुए।

भारत-म्याँमार संबंध

  • वाणिज्यिक और आर्थिक संबंध: भारत म्याँमार का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है, वित्तीय वर्ष 2025 (FY25) में दोनों देशों के बीच 2.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ।
    • भारत म्याँमार को फार्मास्यूटिकल्स (दवाईयाँ), मशीनरी, वाहन, कपास, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है। म्याँमार के दवा बाज़ार में भारतीय दवाओं की हिस्सेदारी लगभग 60% है।
    • म्याँमार मुख्य रूप से दालों, कृषि उत्पादों और लकड़ी के उत्पादों का निर्यात करता है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है। 
  • वित्तीय एकीकरण: भारतीय रुपये (INR) में सीधे व्यापारिक लेन-देन को सुगम बनाने के लिये म्याँमार के बैंकों ने विशेष रुपया वोस्ट्रो खाते (SRVA) स्थापित किये हैं।
    • रुपया-क्यात निपटान तंत्र सीधे द्विपक्षीय व्यापार को सुविधाजनक बनाता है।
  • विकास और कनेक्टिविटी परियोजना: भारत कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट को लागू कर रहा है, सितवे बंदरगाह का प्रबंधन कर रहा है और भारत-म्याँमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के कुछ हिस्सों का निर्माण कर रहा है। 
    • भारत सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) तथा रखाइन राज्य विकास कार्यक्रम (RSDP) के माध्यम से बुनियादी ढाँचे और कल्याणकारी परियोजनाओं का समर्थन करता है। 
  • मानवीय सहायता: संकट के समय सबसे पहले मदद पहुँचाने वाले देश के रूप में अपनी भूमिका का प्रदर्शन करते हुए, भारत ने 'ऑपरेशन सद्भाव' (2024) और 'ऑपरेशन ब्रह्मा' (2025) के माध्यम से म्याँमार को आपदा राहत तथा चिकित्सा सहायता प्रदान की। 
  • सांस्कृतिक और प्रवासी संबंध: दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत बागान में 'आनंद पैगोडा' के भारत द्वारा किये गए जीर्णोद्धार में झलकती है। इसके साथ ही, म्याँमार में रहने वाले 15 से 25 लाख भारतीय प्रवासियों ने दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-साधारण के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

म्याँमार भारत के लिये सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?

  • भू-राजनीतिक प्रवेश द्वार: म्याँमार भारत का एकमात्र ऐसा आसियान (ASEAN) पड़ोसी देश है जिसके साथ भारत की एक लंबी भूमि सीमा (अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम से लगती हुई 1,643 किलोमीटर की सीमा) और बंगाल की खाड़ी में एक समुद्री सीमा दोनों साझा होती हैं। यह स्थिति म्याँमार को भारत की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी की भौगोलिक धुरी का निर्माण करती  है।
  • पूर्वोत्तर की आंतरिक सुरक्षा: अत्यधिक सुगम/सछिद्र सीमा पर जटिल जातीय समानताओं के कारण भारतीय सेना और टाटमाडो (म्याँमार की सेना) के बीच सक्रिय खुफिया जानकारी साझा करने तथा सैन्य सहयोग (जैसे कि ऐतिहासिक 'ऑपरेशन सनराइज') की आवश्यकता होती है, ताकि NSCN-K और ULFA जैसे आतंकवादी गुटों को निष्क्रिय किया जा सके।
    • यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय खतरों के प्रति बेहद संवेदनशील है, जिसमें नशीले पदार्थों की तस्करी ('गोल्डन ट्राएंगल' से), छोटे हथियारों की तस्करी और अवैध प्रवासन शामिल हैं, जिसके लिये एक सक्रिय खुफिया-साझाकरण ढाँचे की आवश्यकता है।
  • चीन का सामना: 'चीन-म्याँमार इकोनॉमिक कॉरिडोर' (CMEC) के माध्यम से बीजिंग का बुनियादी ढाँचागत विकास और क्यॉकफ्यू (Kyaukpyu) गहन समुद्री बंदरगाह का रणनीतिक विकास, भारत के लिये एक समुद्री घेराबंदी का खतरा उत्पन्न करता है।
    • म्याँमार के साथ सक्रिय जुड़ाव भारत को इस प्रभाव को संतुलित करने और म्याँमार के महत्त्वपूर्ण संसाधनों तक पहुँच सुरक्षित करने में मदद करता है। इसमें कचिन राज्य में पाए जाने वाले भारी दुर्लभ मृदा तत्त्व शामिल हैं, जो भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर, रक्षा और हरित ऊर्जा निर्माण ढाँचों के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
  • समुद्री क्षेत्र की जागरूकता: म्याँमार के कोको द्वीप समूह भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के बहुत निकट स्थित हैं। 
    • यह सुनिश्चित करने के लिये निरंतर राजनयिक जुड़ाव महत्त्वपूर्ण है कि इन क्षेत्रों का विरोधी बाहरी ताकतों द्वारा सैन्यीकरण न किया जाए।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार: आसियान (ASEAN) आर्थिक ब्लॉक के साथ भौतिक कनेक्टिविटी पूरी तरह से म्याँमार के पारगमन मार्गों की स्थिरता पर निर्भर करती है।
    • म्याँमार के सहयोग के बगैर, दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत का आर्थिक एकीकरण एक भौगोलिक असंभवता बना रहेगा।

भारत-म्याँमार संबंधों में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

  • लोकतंत्र बनाम सुरक्षा दुविधा: भारत अपने मानक लोकतांत्रिक मूल्यों और कठोर यथार्थवादी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिये लगातार कूटनीतिक कठिनाई का सामना करता है। 
    • जहाँ पश्चिमी देशों ने सैन्य शासन के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लागू कर रखे हैं, वहीं भारत की भौगोलिक निकटता तत्काल निरंतर संवाद की आवश्यकता को अनिवार्य बनाती है।
  • सीमा प्रबंधन और FMR: ऐतिहासिक मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR), जिसने आदिवासी समुदायों को बिना वीज़ा सीमा पार करके 16 किमी. यात्रा करने की अनुमति दी थी, को भारत ने अवैध प्रवास, मादक पदार्थ तस्करी और विद्रोही घुसपैठ के बढ़ते खतरे के कारण स्थगित कर दिया है।
    • स्थानीय समुदाय इस सीमा को एक कृत्रिम औपनिवेशिक विभाजन के रूप में देखते हैं, जो उनके सदियों पुराने पारिवारिक और जातीय संबंधों के बीच दीवार खड़ी करती है। स्थानीय स्तर पर आम सहमति बनाए बिना बाड़ लगाने (फेंसिंग) से उत्तर-पूर्व के नागरिकों में तीव्र असंतोष और अलगाव की भावना पनपने का जोखिम है।
  • अवसंरचनात्मक संबंधी समस्याएँ: कलादान कॉरिडोर जैसे रणनीतिक परियोजनाओं में भारी लागत वृद्धि और समयबद्ध विलंब हुआ है।
    • कठोर भौगोलिक परिस्थितियाँ और राखीन तथा चिन राज्यों में अराकान आर्मी जैसे जातीय सशस्त्र संगठनों (EAOs) का प्रभुत्व परियोजनाओं के निष्पादन को अत्यंत अस्थिर बना देता है।
  • शरणार्थी प्रवाह: वर्ष 2021 में हुए तख्तापलट के बाद गहन आंतरिक संघर्ष ने सीमावर्ती भारतीय राज्यों (मुख्य रूप से मिज़ोरम और मणिपुर) में शरणार्थियों के बड़े पैमाने पर आगमन को प्रेरित किया, जिससे स्थानीय प्रशासन पर अधिक दबाव पड़ा और जनसांख्यिकीय तनाव बढ़ गया।
  • प्रतिष्ठात्मक नुकसान: यह खुलासा कि भारत ने फरवरी 2021 में हुए तख्तापलट के बाद म्याँमार जुंटा (Myanmar Junta) को 51 मिलियन अमेरिकी डॉलर के हथियार सप्लाई किये, एक गंभीर रणनीतिक दुविधा को उजागर करता है।
    • विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप वाले शासन को हथियार सप्लाई करना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तीव्र आलोचना को आकर्षित करता है।
    • संयुक्त राष्ट्र द्वारा इन लेन-देन को स्पष्ट रूप से "डेथ ट्रेड" सक्षम करने वाला बताना भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाता है। 

भारत-म्याँमार संबंधों को कौन-से उपाय मज़बूत कर सकते हैं?

  • कनेक्टिविटी निवेश में जोखिम कम करना: भारत को अपनी अवसंरचनात्मक संपत्तियों के लिये अनुकूलित, बहु-स्तरीय सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिये। इसके लिये कलादान ट्रांज़िट कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं की भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय हितधारकों के व्यापक वर्ग के साथ सूक्ष्म, बैक-चैनल संवाद की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • स्मार्ट सीमा प्रबंधन: व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) की त्वरित तैनाती और असम राइफल्स की क्षमता को सुदृढ़ करना, ताकि पार-संघीय संगठित अपराध को नियंत्रित किया जा सके तथा  मानवीय संवेदनशीलताओं को बनाए रखा जा सके।
  • संस्‍थागत सुरक्षा ढाँचा: असंतोषकारक गतिविधियों के संबंध में वास्तविक समय में सटीक खुफिया जानकारी साझा करने के लिये NSA-स्तरीय चर्चाओं को स्थायी, संरचित सुरक्षा ढाँचे में उन्नत करना।
  • सॉफ्ट पावर का लाभ उठाना: गहन सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक कूटनीति का विस्तार करना, जैसा कि राष्ट्रपति के बोधगया में महाबोधि मंदिर के दौरे और स्वास्थ्य, शिक्षा एवं डिजिटल अवसंरचना में लक्षित विकासात्मक सहायता द्वारा प्रदर्शित होता है।

निष्कर्ष

म्याँमार के साथ भारत की भागीदारी यथार्थवादी राजनीति के व्यावहारिक अनुप्रयोग को दर्शाती है, जिसमें तत्काल सुरक्षा हितों को राजनीतिक स्थिरता और मानवीय आवश्यकताओं के समर्थन के साथ संतुलित किया गया है। दीर्घकालीन सीमा स्थिरता के लिये आर्थिक विकास तथा मज़बूत संस्थानों द्वारा समर्थित सुरक्षा सहयोग आवश्यक है।

 मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारत की रणनीतिक गणना में म्याँमार एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत की सुरक्षा, कनेक्टिविटी और हिंद-प्रशांत उद्देश्यों के लिये इसके महत्त्व का परीक्षण कीजिये।

Ans:-

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. रुपया-क्याट निपटान तंत्र क्या है?
यह एक स्थानीय मुद्रा आधारित व्यापार व्यवस्था है, जो जनवरी 2024 से संचालित है तथा भारत और म्याँमार के बीच सीधे व्यापार निपटान को INR एवं क्याट में सक्षम बनाती है, जिससे विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होती है। 

2. म्याँमार भारत के लिये रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
म्याँमार भारत का एकमात्र ASEAN पड़ोसी है जो भूमि और समुद्री दोनों सीमाएँ साझा करता है, जिससे यह उत्तर-पूर्व सुरक्षा, ASEAN कनेक्टिविटी तथा एक्ट ईस्ट नीति के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाता है।

3. कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट क्या है?
यह एक रणनीतिक कनेक्टिविटी परियोजना है जो समुद्र, नदी और सड़क मार्गों के माध्यम से म्याँमार होकर भारतीय बंदरगाहों को उत्तर-पूर्व भारत से जोड़ती है, जिससे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता कम होती है।

4. भारत और म्याँमार के बीच 'मुक्त आवागमन व्यवस्था' (FMR) क्या है?
FMR ने सीमा पार समुदायों को भारत–म्याँमार सीमा के पार 16 किमी. तक बिना वीज़ा यात्रा करने की अनुमति दी थी। सुरक्षा, प्रवासन और तस्करी संबंधी चिंताओं के कारण भारत ने इसे स्थगित कर दिया है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. मेकांग-गंगा सहयोग जोकि छह देशों की एक पहल है, निम्नलिखित में से कौन-सा/से देश प्रतिभागी नहीं है/हैं? (2015)

  1. बांग्लादेश 
  2. कंबोडिया 
  3. चीन 
  4. म्यांँमार
  5. थाईलैंड

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) केवल 1 और 3

(d) केवल 1, 2 और 5

उत्तर: (c)


मेन्स

प्रश्न. आंतरिक सुरक्षा खतरों तथा नियंत्रण रेखा सहित म्याँमार, बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमाओं पर सीमा पार अपराधों का विश्लेषण कीजिये। विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा इस संदर्भ में निभाई गई भूमिका की विवेचना भी कीजिये। (2020)

Ans:-

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