जीएम फसलें और जीनोम-संपादन (Genome Editing): भारतीय कृषि का भविष्य
बढ़ती आबादी की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय कृषि में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी का समावेश अत्यंत आवश्यक हो गया है। हाल ही में जीएम फसलों और जीनोम-संपादन तकनीकों ने इस क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
1. जीएम फसलें (GM Crops) क्या हैं?
जीएम फसलें वे पौधे होते हैं जिनका डीएनए (DNA) किसी अन्य प्रजाति के डीएनए या जीन को जोड़कर बदला गया होता है।
* यह प्रक्रिया आनुवंशिक रूप से संशोधित करने की तकनीक (Genetic Engineering) का उपयोग करके की जाती है।
* भारत में वर्तमान में केवल **'बीटी कपास'** ही एकमात्र ऐसी जीएम फसल है जिसे व्यावसायिक खेती के लिए मंजूरी मिली है।
2. जीनोम-संपादन (Genome Editing) और SDN तकनीक
जीनोम-संपादन एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें **साइट-डायरेक्टेड न्यूक्लिएज (SDNs)** का उपयोग किया जाता है। इसके तीन मुख्य प्रकार हैं:
SDN-1: इसमें डीएनए टेम्पलेट के बिना डायरेक्ट उत्परिवर्तन किया जाता है।
SDN-2: इसमें डीएनए अनुक्रम टेम्पलेट का उपयोग किया जाता है।
SDN-3: इसमें बड़े डीएनए अनुक्रम का साइट-डायरेक्टेड समावेश किया जाता है।
**महत्वपूर्ण:** भारत सरकार ने SDN-1 और SDN-2 तकनीकों से विकसित बीजों को जीएम फसलों के कड़े नियमों से छूट दी है, क्योंकि इनमें कोई बाहरी जीन नहीं होता है।
## 3. भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धि
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जीनोम-संपादन तकनीक का उपयोग करके नई किस्में विकसित की हैं:
DRR धान-100 (कमला):** यह भारत की पहली जीनोम-संपादित चावल की किस्म है।
पूसा DST धान-1:** यह भी इसी तकनीक का एक सफल परिणाम है।
4. नियामक ढांचा (Regulatory Framework)
भारत में इन गतिविधियों की निगरानी के लिए एक स्पष्ट ढांचा मौजूद है:
GEAC: यह आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों के उपयोग और आयात/निर्यात के लिए मुख्य नियामक समिति है।
RCGM और SBCC:** ये समितियाँ अनुसंधान और राज्य स्तर पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा और निगरानी करती हैं।
-----------------------------------------------------******-----------------------------------------------------
### UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
**प्रश्न:** "भारत में कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए 'जीएम फसलों' और 'जीनोम-संपादन' (Genome Editing) की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इस संदर्भ में, भारत के नियामक ढांचे की व्याख्या कीजिए और SDN-1 तथा SDN-2 तकनीकों को दी गई छूट के महत्व पर चर्चा कीजिए।" (250 शब्द)
ans:-
==================================================================
👉 **"आज ही यह पुस्तक खरीदें और अपनी UPSC तैयारी को सही दिशा दें।"**
क्या आप इस विषय के किसी विशेष पहलू पर और अधिक विस्तार से जानकारी चाहते हैं?
NOTES:- मेरे टेलीग्राम पर.. Answer भेजे और check करवाए..👇👇
🎯 Focus Orbit Educational Network से जुड़ें:
UPSC Civil Services परीक्षा की पूरी तैयारी और daily updates के लिए हमारे अन्य महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म्स को अभी फॉलो करें:
* 🌐 Our Blogger Website (Daily Current Affairs): https://focusorbitupsc.blogspot.com/
* 🌐 Our WordPress Blog (Prelims MCQ Tests): https://focusorbitupsc.wordpress.com/
* 📸 Follow on Instagram (Daily Mindmaps & Shorts): https://www.instagram.com/focusorbit_official/
* 📺 Subscribe on YouTube (Video Lectures): https://www.youtube.com/@Focusorbit_official
* 🐦 Follow on Twitter/X (Important Articles & News): https://x.com/Ravikumar676416
* 👥 Follow Facebook Page: https://www.facebook.com/focusorbitofficial/
* 👤 Connect on Facebook Profile: https://www.facebook.com/ravikumar676416/
* 🌐 Our Smart Digital Card: https://ravi7star.cam