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Saturday, 16 May 2026

National Emergency and Amendments: आपातकाल के दौरान और बाद के प्रमुख संवैधानिक संशोधन | UPSC Polity Notes

 राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) और प्रमुख संवैधानिक संशोधन: UPSC राजव्यवस्था (GS Paper 2) विशेष नोट्स

भारतीय संविधान में आपातकाल से संबंधित प्रावधान एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. 25 जून 1975 को भारत में लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल के हाल ही में 50 वर्ष पूरे हुए हैं. इस लेख में हम आपातकाल के बुनियादी नियमों के साथ-साथ उसके दौरान और बाद में हुए प्रमुख संवैधानिक संशोधनों (38th, 39th, 42nd, and 44th Amendments) का बिंदुवार विश्लेषण करेंगे.

1. आपातकाल के बारे में बुनियादी जानकारी (Basic Facts)
  • संवैधानिक प्रावधान: आपातकाल से संबंधित प्रावधान भारतीय संविधान के भाग XVIII (Part 18) के अनुच्छेद 352 से 360 तक दिए गए हैं.
  • स्रोत (Source): आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के निलंबन का प्रावधान जर्मनी के वाइमर संविधान से लिया गया है.
  • इतिहास: भारत में अब तक कुल तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया है: 1962 (चीनी आक्रमण), 1971 (पाकिस्तान युद्ध), और 1975 (आंतरिक अशांति).

2. आपातकाल की समयसीमा और प्रमुख संशोधन (Timeline 1975 - 1978)
A. 38वां संविधान संशोधन (1975)
  • आपातकाल की घोषणा को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था (यानी कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता था).
B. 39वां संविधान संशोधन (1975)
  • संसद को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावी विवादों का निर्णय लेने का एकमात्र अधिकार दिया गया.
C. 42वां संविधान संशोधन (1976) - जिसे 'लघु संविधान' भी कहते हैं
  • इसके तहत व्यापक बदलाव किए गए, जिसमें नीति निदेशक तत्वों (DPSP) को मूल अधिकारों पर प्राथमिकता दी गई, न्यायपालिका की शक्तियों में कटौती की गई और लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया.
D. शाह आयोग (1977)
  • आपातकाल के दौरान हुए दुरुपयोगों और ज्यादतियों की जांच के लिए इस आयोग का गठन किया गया था.
E. 44वां संविधान संशोधन (1978) - जनता पार्टी सरकार द्वारा 'सुधार'
  • शब्दावली में बदलाव: राष्ट्रीय आपातकाल के आधारों में से "आंतरिक अशांति" शब्द को हटाकर उसके स्थान पर "सशस्त्र विद्रोह" शब्द को शामिल किया गया.
  • न्यायिक समीक्षा की बहाली: न्यायपालिका की उस शक्ति को वापस बहाल किया गया, जिससे वह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित विवादों की जांच कर सके.
  • लोकसभा कार्यकाल: लोकसभा का कार्यकाल 6 वर्ष से घटाकर पुन: 5 वर्ष कर दिया गया.

3. 44वें संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा किए गए अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
  • कैबिनेट की लिखित मंजूरी अनिवार्य: राष्ट्रपति केवल तभी आपातकाल घोषित कर सकते हैं जब केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) लिखित में अपनी सहमति दे.
  • संसदीय अनुमोदन: आपातकाल की घोषणा को 1 महीने के भीतर विशेष बहुमत द्वारा संसद से पास होना अनिवार्य किया गया.
  • मूल अधिकारों की सुरक्षा (अनुच्छेद 20 और 21): अनुच्छेद 359 का दायरा सीमित किया गया. अब आपातकाल के दौरान भी नागरिकों के अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता.
  • संपत्ति का अधिकार: संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक सामान्य कानूनी/संवैधानिक अधिकार बना दिया गया.

UPSC Mains Practice Question:
प्रश्न: "44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 मुख्य रूप से 42वें संशोधन द्वारा किए गए विकृतियों को दूर करने और भविष्य में आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाया गया था।" इस कथन की समीक्षा कीजिए. (250 शब्द, 15 अंक)